
प्रतीक्षा एक भावदशा है... प्रतीक्षा एक अनुभूति है.... प्रतीक्षा एक रास्ता है... जिसके एक chor पर हम होते है ....ठहरे हुए ...औरdusre च्होर पर कोई और होता है .... हम नही जानते कि वोः हमारी ओर आ रहा है॥ या हमसे दूर जा रहा है ...प्रतीक्षा में peer है ...आशु है बैचेनी परन्तु निराशा नही प्रतीक्षा हमेशा जगी रहने वाली आशा का ही दूसरा रूप है । हम सभी प्रतीक्षा रत है ... किसी को अपने आराध्य की प्रतीक्षाहै ....किसी को अपने प्रिये प्रतीक्षा है कोई अपने अच्छे समय की प्रतीक्षा कर रहा है ...तो कोई बस प्रतीक्षा कर रहा है .... न जाने किस की .प्रतीक्षा हमहे तापती है । उतना ही निखारती भी है। आवश्यकता है तो बस धर्य की ।
' ध्रितिर्नाम सूखे दुखे यथा नाप्नोति विक्रियाम!

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