
ऱोज़, हरेक पल नई घटनाओँ को,जनम देता हुआ नगर.मानव खो गया है एकमृगमरीचिका के पीछे,शेष कूछ बचा है तो यह नगर.कोलाहल, भीधः एक दूसरे को पीछे धकेलनेकी प्रतिस्पर्धा को जनम देता है यह नगर.आज नित नये परिधानो से सुसज्जित, किसी गरीब की मेहनत का प्रतिफल है ,यह नगर.गगनचुम्बी ईमारतों से युक्त,लेकिन इंसानी रिश्तों से दूर ,एक अलग दुनिया बसा चूका है, यह नगर.इस मे दया, सहानूभूति नही,क्योंकि देश का सर्वशेत हैयह महानगर.

2 comments:
mahangron ka sahi chitran kiya,sabkuch anjana ho gaya hai,bas hai to ek chakachaundh,jiske aage kuch nazar nahin aata.........
Very Nice
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